घूँघट में दुल्हन

घूँघट में छुपके
वो #दुल्हन सी शरमाये

मन की व्यथा कैसे
सुनाऊँ ये उलझन बढ़ती जाये

मनसा रही अधूरी
प्रशंसा उसकी भी ज़रूरी
बनी दूरी जो उसकी मजबूरी

दीदार को
उसके अभिलाषा बढ़ती जाये
पर शरमाये लजाये ऐसे वो की
पल पल की आशा निराशा में बदलती जाये
धड़कन बढ़ती जाये !!

शब्दनिधि

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