Awanish Kumar ki poetry mai aapka hardik swagat ha
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#अवनीश कुमार
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घूँघट में दुल्हन
घूँघट में छुपकेवो #दुल्हन सी शरमाये मन की व्यथा कैसेसुनाऊँ ये उलझन बढ़ती जाये मनसा रही अधूरीप्रशंसा उसकी भी ज़रूरीबनी दूरी जो उसकी मजबूरी दीदार कोउसके अभिलाषा बढ़ती जायेपर शरमाये लजाये ऐसे वो कीपल पल की आशा निराशा में बदलती जायेधड़कन बढ़ती जाये !! शब्दनिधि
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काश वो दिन
काश वो दिनऐसा कब आयेगा संदेशा प्रेम काउनके कब आयेगा ये ज़िंदगी उनकेबिना इतनी भी हसीन नहीं कहना मुश्किल है की उनकेबिना ज़िंदगी में कोई कमी नहीं क्या यूँही उनकेइंतज़ार में सारा वक्त गुजर जायेगा पर दिल कहता हैउनके प्रेम का संदेशा एक दिन ज़रूर आयेगा
कवि
कवि अवनीश कुमार
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